व्याकरण
वह शब्द जिससे किसी कार्य के होने या करने का बोध हो, उसे क्रिया कहते हैं। यह किसी कार्य की अवस्था, स्थिति या घटना को भी दर्शाता है।
संक्षेप में, जो शब्द किसी काम के करने या होने को प्रकट करते हैं, वे क्रिया कहलाते हैं।
उदाहरण:
- मोहन पढ़ रहा है। (पढ़ना - कार्य का होना)
- बच्चा खेल रहा है। (खेलना - कार्य का होना)
- वह खाना खाता है। (खाना - कार्य का करना)
- सीता गाना गाती है। (गाना - कार्य का करना)
- नदी बह रही है। (बहना - स्थिति)
- सूर्य चमकता है। (चमकना - स्थिति)
- मैंने एक पत्र लिखा। (लिखना - कार्य का करना)
- वह बहुत दौड़ा। (दौड़ना - कार्य का करना)
इन सभी उदाहरणों में 'पढ़ रहा है', 'खेल रहा है', 'खाता है', 'गाती है', 'बह रही है', 'चमकता है', 'लिखा' और 'दौड़ा' शब्द क्रियाएँ हैं क्योंकि ये किसी न किसी कार्य के होने या करने का बोध करा रहे हैं।
संधि की परिभाषा:
संधि का शाब्दिक अर्थ होता है 'मेल' या 'जोड़'। व्याकरण में, दो वर्णों (अक्षरों) के आपस में मिलने से उनमें जो परिवर्तन या विकार उत्पन्न होता है, उसे संधि कहते हैं। यह विकार कभी पहले वर्ण में, कभी दूसरे वर्ण में और कभी दोनों में होता है। संधि का उद्देश्य उच्चारण को सहज और सुंदर बनाना है।
संधि के भेद:
संधि मुख्यतः तीन प्रकार की होती है:
- स्वर संधि (Swar Sandhi):
दो स्वरों के मेल से होने वाले परिवर्तन को स्वर संधि कहते हैं। इसमें पहले शब्द का अंतिम वर्ण स्वर होता है और दूसरे शब्द का पहला वर्ण भी स्वर होता है।
उदाहरण:
- सूर्य + अस्त = सूर्यास्त (अ + अ = आ)
- विद्या + आलय = विद्यालय (आ + आ = आ)
- कवि + इंद्र = कवींद्र (इ + इ = ई)
स्वर संधि के प्रमुख भेद हैं: दीर्घ संधि, गुण संधि, वृद्धि संधि, यण संधि और अयादि संधि।
- व्यंजन संधि (Vyanjan Sandhi):
व्यंजन के साथ व्यंजन या स्वर के मेल से होने वाले परिवर्तन को व्यंजन संधि कहते हैं। इसमें पहला वर्ण व्यंजन और दूसरा वर्ण व्यंजन या स्वर हो सकता है, या पहला वर्ण स्वर और दूसरा वर्ण व्यंजन हो सकता है।
उदाहरण:
- दिक् + गज = दिग्गज (क् + ग = ग्ग)
- जगत् + ईश = जगदीश (त् + ई = दी)
- उत् + लास = उल्लास (त् + ल = ल्ल)
- विसर्ग संधि (Visarg Sandhi):
विसर्ग (:) के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से होने वाले परिवर्तन को विसर्ग संधि कहते हैं। विसर्ग के स्थान पर परिवर्तन होता है।
उदाहरण:
- निः + बल = निर्बल (ः + ब = र्ब)
- मनः + रथ = मनोरथ (ः + र = ओ)
- निः + छल = निश्छल (ः + छ = श्छ)
आपने सही कहा कि 'प्रत्यावर्तन' शब्द 'प्रति + आवर्तन' की संधि से बना है, जिसमें 'इ + आ' मिलकर 'या' हो गया है। यह 'यण् संधि' का एक उदाहरण है।
इसी प्रकार, नीचे दिए गए शब्दों में संधि करके नए शब्द इस प्रकार बनेंगे:
- प्रति + एक = प्रत्येक
- अति + आचार = अत्याचार
- प्रति + उपकार = प्रत्युपकार
- इति + आदि = इत्यादि
- उपरि + उक्त = उपर्युक्त
जी, बिल्कुल! यहाँ दिए गए शब्दों का विग्रह और समास का नाम है:
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मृग-समूह:
- विग्रह: मृगों का समूह
- समास का नाम: तत्पुरुष समास (षष्ठी तत्पुरुष)
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हाथ-मुंह:
- विग्रह: हाथ और मुंह
- समास का नाम: द्वन्द्व समास
-
उतार-चढ़ाव:
- विग्रह: उतार और चढ़ाव
- समास का नाम: द्वन्द्व समास
-
व्यथा-कथा:
- विग्रह: व्यथा और कथा
- समास का नाम: द्वन्द्व समास
आपकी जानकारी बिलकुल सही है। 'प्रिय' शब्द जोड़कर नए शब्द और उनके अर्थ इस प्रकार हैं:
- अनुशासन + प्रिय = अनुशासनप्रिय
अर्थ: वह जिसे अनुशासन पसंद हो; जो अनुशासित रहना पसंद करता हो या अनुशासन का पालन करता हो।
- जन + प्रिय = जनप्रिय
अर्थ: लोगों को प्रिय लगने वाला; जनता द्वारा पसंद किया जाने वाला; लोकप्रिय।
- लोक + प्रिय = लोकप्रिय
अर्थ: लोगों में प्रसिद्ध या सम्मानित; जिसे बहुत से लोग पसंद करते हों।
- न्याय + प्रिय = न्यायप्रिय
अर्थ: वह जिसे न्याय पसंद हो; जो न्याय का समर्थन करता हो या न्याय के पक्ष में रहता हो।
- सत्य + प्रिय = सत्यप्रिय
अर्थ: वह जिसे सत्य पसंद हो; जो सदा सच बोलता हो या सत्य का साथ देता हो।
वर्ण विच्छेद इस प्रकार है:
रईस: र् + अ + ई + स् + अ
संकल्प: स् + अ + ङ् + क् + अ + ल् + प् + अ
साईस: स् + आ + ई + स् + अ
बड़ी: ब् + अ + ड़् + ई
यहाँ दिए गए शब्दों के वचन बदले हुए रूप इस प्रकार हैं:
- खुशी: खुशियाँ
- मिठाई: मिठाइयाँ
- तितली: तितलियाँ
- मछली: मछलियाँ
- लकड़ी: लकड़ियाँ
- लड़की: लड़कियाँ