किले
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गाठकून्डा किला, जिसे कुछ लोग कंधार किला भी कहते हैं, भारत के बिहार राज्य के कैमूर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। इसका इतिहास काफी पुराना है और यह क्षेत्र के महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों में से एक है।
- निर्माण और काल: इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में राजा भैंसा सिंह ने करवाया था। कई स्रोतों के अनुसार, इसका निर्माण लगभग 1515 ईस्वी में हुआ था।
- स्थान और महत्व: यह किला कैमूर की पहाड़ियों में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यह क्षेत्र के व्यापार मार्गों और सैन्य गतिविधियों पर नियंत्रण रखने में सहायक था।
- शेरशाह सूरी से संबंध: ऐसा माना जाता है कि शेरशाह सूरी ने भी इस किले का उपयोग किया था या इसे मजबूत किया था। शेरशाह सूरी का इस क्षेत्र से गहरा संबंध था, और उन्होंने रोहतासगढ़ जैसे कई किलों का जीर्णोद्धार या निर्माण करवाया था। गाठकून्डा किला भी उनके नियंत्रण में रहा होगा।
- वर्तमान स्थिति: वर्तमान में यह किला काफी हद तक खंडहर में बदल चुका है, लेकिन इसकी दीवारें और कुछ संरचनाएं अभी भी इसके गौरवशाली अतीत की कहानी कहती हैं। यह एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल है और इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
गाठकून्डा किला कैमूर क्षेत्र के समृद्ध इतिहास और वास्तुकला का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है, जो उस समय के स्थानीय शासकों और बड़े साम्राज्यों के बीच शक्ति संघर्ष को दर्शाता है।
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भारत की महान दीवार (The Great Wall of India)
इस दीवार को कुम्भलगढ़ की दीवार भी बोलते हैं। इस दीवार की शानदार बनावट और लम्बाई को देखते हुए इसे भारत की महान दीवार का दर्जा दिया गया है।
यह दीवार 36 किलोमीटर लम्बी है और चीन की महान दीवार के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे लम्बी दीवार है। 2013 में UNESCO ने इस दीवार और कुम्भलगढ़ किले को दुनिया के महान धरोहर स्थल का दर्जा दिया।
इस दीवार को कुम्भलगढ़ की दीवार भी बोलते हैं। इस दीवार की शानदार बनावट और लम्बाई को देखते हुए इसे भारत की महान दीवार का दर्जा दिया गया है।
यह दीवार 36 किलोमीटर लम्बी है और चीन की महान दीवार के बाद यह दुनिया की दूसरी सबसे लम्बी दीवार है। 2013 में UNESCO ने इस दीवार और कुम्भलगढ़ किले को दुनिया के महान धरोहर स्थल का दर्जा दिया।