त्योहार
होली भारत के सबसे पुराने और रंगीन त्योहारों में से एक है। इसे कई कारणों से मनाया जाता है, जिनमें पौराणिक, सांस्कृतिक और मौसमी महत्व शामिल हैं:
- बुराई पर अच्छाई की जीत: होली का सबसे प्रमुख पौराणिक महत्व हिरण्यकशिपु, भक्त प्रहलाद और होलिका की कहानी से जुड़ा है। हिरण्यकशिपु को भगवान विष्णु का परम विरोधी माना जाता था, और उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था। हिरण्यकशिपु ने अपनी बहन होलिका को प्रहलाद को आग में जलाने का आदेश दिया, क्योंकि होलिका को वरदान था कि वह आग से नहीं जलेगी। हालाँकि, भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गया और होलिका जलकर भस्म हो गई। यह घटना बुराई पर अच्छाई, सत्य पर असत्य और भक्ति की जीत का प्रतीक है। इसी उपलक्ष्य में होली से एक रात पहले होलिका दहन किया जाता है।
- भगवान कृष्ण और राधा का प्रेम: ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन) में होली का त्योहार भगवान कृष्ण और राधा के अमर प्रेम से भी जुड़ा है। ऐसा माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी साँवली रंगत के कारण राधा से शिकायत की थी। यशोदा मैया ने उन्हें राधा और अन्य गोपियों के चेहरे को उसी रंग में रंगने का सुझाव दिया जिस रंग में वे खुद रंगना चाहते थे। तब से, यह रंगीन खेल होली का एक अभिन्न अंग बन गया।
- वसंत ऋतु का आगमन: होली वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है। यह त्योहार सर्दियों के अंत और नई फसल के मौसम की शुरुआत का जश्न मनाता है। प्रकृति में नए फूल खिलते हैं और चारों ओर हरियाली छा जाती है, जो जीवन में नए उत्साह और खुशी का संचार करती है।
- सामाजिक समरसता और भाईचारा: होली के दिन लोग सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे को रंग लगाते हैं, मिठाइयाँ बाँटते हैं और गले मिलते हैं। यह सामाजिक एकता, भाईचारे और प्यार को बढ़ावा देता है।
संक्षेप में, होली एक ऐसा त्योहार है जो धार्मिक आस्था, प्रेम, खुशी और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक है।
होली के विषय पर पाँच वाक्य इस प्रकार हैं:
- होली भारत का एक बहुत ही लोकप्रिय और प्राचीन त्योहार है, जिसे रंगों के त्योहार के रूप में जाना जाता है।
- यह हर साल वसंत ऋतु में फाल्गुन मास की पूर्णिमा को पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया जाता है।
- इस दिन लोग एक-दूसरे पर गुलाल, अबीर और पानी के रंग लगाकर अपनी खुशी का इजहार करते हैं।
- होली से एक रात पहले होलिका दहन की परंपरा होती है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
- यह त्योहार लोगों के बीच प्रेम, भाईचारा और एकता का संदेश देता है, और सभी गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ जश्न मनाने का मौका प्रदान करता है।
होली रंगों का त्योहार है जो पूरे भारत में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।
यह फाल्गुन मास की पूर्णिमा को आता है और वसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
इस दिन लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हैं, पानी से खेलते हैं और स्वादिष्ट पकवानों का आनंद लेते हैं।
होली बुराई पर अच्छाई की जीत और आपसी भाईचारे का प्रतीक है।
यह त्योहार लोगों के जीवन में खुशियाँ और उमंग भर देता है।
2026 में गणेश उत्सव
14 सितंबर 2026, सोमवार
को मनाया जाएगा। यह गणेश चतुर्थी का दिन होगा, जिससे 10 दिवसीय उत्सव की शुरुआत होगी।- 26 जनवरी, रविवार: गणतंत्र दिवस
- 26 फरवरी, बुधवार: महा शिवरात्रि
- 11 फरवरी, मंगलवार: शहरी निकाय चुनाव के तहत मतदान के कारण राजनांदगांव और बलरामपुर में सार्वजनिक अवकाश
- 14 मार्च, शुक्रवार: होली
- 31 मार्च, सोमवार: ईद-उल-फितर
- 6 अप्रैल, रविवार: राम नवमी
- 10 अप्रैल, गुरुवार: महावीर जयंती
- 14 अप्रैल, सोमवार: डॉ. अम्बेडकर जयंती
- 18 अप्रैल, शुक्रवार: गुड फ्राइडे
- 12 मई, सोमवार: बुद्ध पूर्णिमा
- 7 जून, शनिवार: बकरीद/ईद अल-अधा
- 11 जून, बुधवार: संत गुरु कबीर जयंती
- 26 जून, गुरुवार: मुहर्रम
- 9 अगस्त, शनिवार: रक्षा बंधन
- 15 अगस्त, शुक्रवार: स्वतंत्रता दिवस
- 16 अगस्त, शनिवार: जन्माष्टमी
- 6 सितंबर, शनिवार: ईद ए मिलाद
- 2 अक्टूबर, गुरुवार: विजया दशमी
- 2 अक्टूबर, गुरुवार: गांधी जयंती
- 20 अक्टूबर, सोमवार: दिवाली
- 27 अगस्त, बुधवार: गणेश चतुर्थी
- 30 सितंबर, मंगलवार: दशहरा (महा अष्टमी)
- 21 अक्टूबर, मंगलवार: गोवर्धन पूजा (दीपावली का दूसरा दिन)
- 5 नवंबर, बुधवार: गुरु नानक जयंती
- 18 दिसंबर, गुरुवार: गुरु घासीदास जयंती
- 25 दिसंबर, गुरुवार: क्रिसमस
अधिक जानकारी के लिए, आप भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट देख सकते हैं:
यह दिवस प्रसिद्ध भारतीय वैज्ञानिक और सांख्यिकीविद प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
इस दिन का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक योजना और नीति निर्माण में सांख्यिकी के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।