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प्राचीन सभ्यताएँ

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हड़प्पा सभ्यता के लोगों का भिन-विनात्रा (आजीविका) मुख्यतः कृषि, पशुपालन, व्यापार और विभिन्न शिल्पों पर आधारित था।

  • कृषि: यह उनकी अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार था। वे गेहूँ, जौ, सरसों, मटर, तिल, दालें और कपास जैसी फसलें उगाते थे। सिंचाई के लिए नदियों और नहरों का उपयोग किया जाता था।
  • पशुपालन: वे गाय, भैंस, भेड़, बकरी और मुर्गी जैसे जानवरों को पालते थे। इन जानवरों का उपयोग दूध, मांस, ऊन और कृषि कार्यों के लिए किया जाता था।
  • व्यापार: हड़प्पावासी आंतरिक और बाहरी दोनों तरह का व्यापार करते थे। वे मेसोपोटामिया, ओमान और फारस की खाड़ी के क्षेत्रों जैसे दूरदराज के स्थानों से व्यापार करते थे। व्यापार के लिए बाट और मापों का एक मानकीकृत प्रणाली का उपयोग किया जाता था। वे धातुओं (जैसे तांबा, टिन, सोना, चांदी), कीमती पत्थरों, लकड़ी और अन्य वस्तुओं का आयात करते थे, और अनाज, कपास, मनके और मिट्टी के बर्तन जैसे उत्पादों का निर्यात करते थे।
  • शिल्प और उद्योग: हड़प्पा सभ्यता के लोग विभिन्न शिल्पों में निपुण थे। इनमें मिट्टी के बर्तन बनाना, मनके बनाना (विशेषकर कार्नेलियन और स्टीटाइट के), धातु का काम (तांबा, कांसे के उपकरण और हथियार), कपड़े बनाना और आभूषण बनाना शामिल था। शहरी केंद्रों में कुशल कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका थी।
  • श्रम का विभाजन: शहरीकरण के कारण समाज में श्रम का विभाजन भी हुआ था, जिसमें विभिन्न लोग विशिष्ट कार्यों में लगे हुए थे, जैसे किसान, कारीगर, व्यापारी, प्रशासक आदि।
उत्तर लिखा · 19/3/2026
कर्म · 1020