जातिगत इतिहास
0
Answer link
महार भारत के महाराष्ट्र राज्य में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक समुदाय है। इनका इतिहास बहुत पुराना और संघर्षपूर्ण रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उत्पत्ति:
- महार समुदाय का उल्लेख प्राचीन काल से मिलता है। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वे महाराष्ट्र के मूल निवासी हैं और प्राचीन काल से ही इस क्षेत्र में रहते आए हैं।
- परंपरागत रूप से, महार समुदाय को ग्राम सेवक, सीमा रक्षक, संदेशवाहक, और कभी-कभी सफाई कर्मचारी के रूप में भी देखा जाता था। वे गाँव की सुरक्षा और व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
- सदियों से, उन्हें भारतीय जाति व्यवस्था में सबसे निचले पायदान पर 'अछूत' माना जाता था, जिसके कारण उन्हें गंभीर सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक भेदभाव का सामना करना पड़ा।
ब्रिटिश काल और सैन्य सेवा:
- ब्रिटिश शासन के दौरान, महार समुदाय के कई लोगों ने ब्रिटिश सेना में सेवा दी। उनकी बहादुरी और वफादारी के लिए उन्हें सराहा गया।
- लेकिन बाद में, ब्रिटिश सरकार ने जातिगत भेदभाव के चलते उन्हें सेना से बाहर करना शुरू कर दिया, जिससे उनके जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
डॉ. बी.आर. अम्बेडकर और नव-बौद्ध आंदोलन:
- महार समुदाय के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ डॉ. बी.आर. अम्बेडकर के नेतृत्व में आया। डॉ. अम्बेडकर स्वयं एक महार थे और उन्होंने अपने समुदाय सहित सभी दलितों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।
- उन्होंने महार समुदाय को संगठित किया और उन्हें सामाजिक समानता और न्याय के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।
- महाड़ सत्याग्रह (1927): यह महार समुदाय द्वारा सार्वजनिक पानी के उपयोग के अधिकार के लिए किया गया एक ऐतिहासिक आंदोलन था, जिसका नेतृत्व डॉ. अम्बेडकर ने किया।
- धर्मांतरण: 1956 में, डॉ. अम्बेडकर ने लाखों महार और अन्य दलितों के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया। यह भेदभावपूर्ण हिंदू जाति व्यवस्था से मुक्ति पाने और आत्मसम्मान प्राप्त करने का एक प्रतीकात्मक कार्य था। इस घटना ने भारत में नव-बौद्ध आंदोलन की नींव रखी।
स्वतंत्रता के बाद:
- स्वतंत्रता के बाद, भारत के संविधान ने अस्पृश्यता को समाप्त कर दिया और अनुसूचित जातियों (जिसमें महार भी शामिल हैं) के लिए आरक्षण और अन्य सुरक्षात्मक प्रावधान किए।
- आज भी, महार समुदाय शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-राजनीतिक क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है, हालांकि उन्हें अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
संक्षेप में, महार समुदाय का इतिहास संघर्ष, उत्पीड़न और अंततः सशक्तिकरण और आत्मसम्मान की खोज का इतिहास है, जिसमें डॉ. बी.आर. अम्बेडकर का योगदान अतुलनीय है।