मारण तंत्र के बारे में बताएं?

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मारण तंत्र के बारे में बताएं?

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सिद्ध तांत्रिकों द्वारा मां कामाख्या, मां, तारा, धूमेश्वरी की घोर साधना और विशेष जप करके अनेक सिद्धियां प्राप्ति कर लेते हैं। और अपनी मंत्रशक्ति से किसी भी व्यक्ति का पुतला बनाकर मरण मंत्र के जाप, आहुति से प्राण ले लेते हैं।
मारण प्रयोग करने से पुतले में पहले शत्रु की आकृति बनती है और एक विशेष तरह की अग्नि जो आत्मा का प्रतीक है, वह जेल उठती है। ये चित्र अंत में देखें।

आप इस प्रक्रिया को आम के भीमाशंकर मंदिर, तंत्र नवग्रह मंदिर, मां कामाख्या के मंदिर में इन मारण तांत्रिकों को तंत्र, मंत्र करते हुए देख सकते हैं।
एक सिद्ध तंत्रिक अवधूत से मेरी मुलाकात हुई और मांरण मंत्र के बारे में जानकारी ली। तांत्रिक द्वारा दुर्लभ मांरण मंत्र बताया।
मारणमन्त्रः पुत्तलीकरणविधिश्च

मारणं तु प्रकुर्वीत ब्राह्मणेतरविद्विषि।

तच्छुद्ध्यर्थं जपेन्मूलमन्त्रमष्टोत्तरं शतम्॥

कृष्णाङ्गारचतुर्दश्यां गोपुराद्वा चतुष्पथात्।

श्मशानाद्वा समानीय मृदं तत्र विनिःक्षिपेत्॥

विडङ्गानि हयार्यर्ककुसुमान्यपि मन्त्रवित्।

तन्मृदापुत्तलीं कुर्याच्छ्मशाने निर्जनालये॥

उपविश्य शिखामुक्तो नीलवस्त्रावृतो निशि।

तद्वक्षसि रिपोर्नाम लिखित्वा स्थापयेदसून॥

श्मशानवाससाच्छाद्य तैलाभ्यक्तामथार्च्चयेत्।

स्नापयेत्पुत्तलीं तां तु खराश्वमहिषासृजा॥ रक्तचन्दनधत्तूरकुसुमान्यर्पयेत्ततः

मारणाख्येन मनुना कुर्याद्धोमं च पूजनम्॥

उपरोक्त मंत्र को 11000 बार जपकर सिद्ध किया जाता है।

शीघ्रं विद्वेषय विद्वेषय रोधय रोधय भञ्जय भञ्जय श्रीं ह्रीं राज्यै ॐ हु हुं हुं इति। ततः खरमाहिषाश्वपुच्छरोमकृतया रज्ज्वा तत्फलकद्वयं मिथो बद्ध्वा वल्मीकरन्ध्रे निखाय पुनर्मन्त्रं सहस्रं जपेत्ए। वं विद्वेषणसिद्धिः।। मारणमाह मारणमिति। तद्विप्रे निषिद्धम्।। विडंगं कृमिघ्नम्। हयारिः करवीरः।

मारण मंत्र का प्रयोग कब करें

मारण का प्रयोग तभी करना चाहिए जब ब्राह्मणेतर शत्रु हो, ब्राह्मण पर कभी मारण प्रयोग न करे, शास्त्र से निषिद्ध है । मारण प्रयोग करने पर शुद्धि के लिये मूल मन्त्र का एक सौ आठ बार जप करना चाहिए।।
कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को जब मङ्गलवार का दिन हो तो गोपुर, चतुष्पच या श्मशान से मिट्टी ला कर उसमें बायबिडङ्ग, कनेर और आक ( मन्दार ) का फूल मिला कर उससे शत्रु की पुतली का निर्माण करना चाहिए।
फिर रात्रि के समय श्मशान में अथवा किसी शून्य घर में शिखा खोल कर, नीला वस्त्र पहन कर बैठ कर पुतली की छाती पर शत्रु का नाम लिख कर, उसमें प्राण प्रतिष्ठा करनी चाहिए।
फिर उसको कफन से ढँक कर तेल में डुबो कर उसका पूजन करना चाहिए।
तदनन्तर उस पुतली को गदहा, घोड़ा, और भैंस के रक्त से स्नान कराना चाहिए । फिर लालचन्दन और धतूरे के फूल चढ़ा कर मारण मन्त्र से होम कर उसका पूजन करना चाहिए।
मारण मंत्र की सभी क्रियाएं किसी योग्य तांत्रिक गुरु के सानिध्य में ही करना चाहिए।
अमृतम पत्रिका, ग्वालियर से साभार




उत्तर लिखा · 19/1/2023
कर्म · 1790
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मारण तंत्र, जिसे मारण क्रिया भी कहा जाता है, तांत्रिक साधनाओं का एक हिस्सा है। यह एक विवादास्पद विषय है और इसमें किसी व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने या मारने के लिए मंत्रों और अनुष्ठानों का उपयोग शामिल है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि मारण तंत्र का अभ्यास भारत और दुनिया के कई हिस्सों में अवैध है और इसे अनैतिक माना जाता है।

यहां मारण तंत्र के बारे में कुछ जानकारी दी गई है:

  • उद्देश्य: माना जाता है कि मारण तंत्र का उपयोग शत्रु को नष्ट करने, गंभीर बीमारी लाने या मृत्यु का कारण बनने के लिए किया जाता है।
  • विधि: इस क्रिया में विशिष्ट मंत्रों का जाप, अनुष्ठान करना और नकारात्मक ऊर्जा को लक्षित व्यक्ति पर केंद्रित करना शामिल है।
  • जोखिम: मारण तंत्र का अभ्यास करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनमें कानूनी दंड और नकारात्मक कर्म शामिल हैं। इसके अलावा, यह माना जाता है कि यदि अनुष्ठान गलत तरीके से किया जाता है तो यह उल्टा भी पड़ सकता है और साधक को नुकसान पहुंचा सकता है।

मैं आपको मारण तंत्र का अभ्यास करने के खिलाफ दृढ़ता से सलाह देता हूं। यदि आप किसी शत्रु या नकारात्मक ऊर्जा से परेशान हैं, तो कानूनी और नैतिक तरीकों से समाधान खोजना बेहतर है, जैसे कि कानूनी सहायता लेना या आध्यात्मिक गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करना।

अधिक जानकारी के लिए, आप निम्नलिखित स्रोतों को देख सकते हैं (अंग्रेजी में):

Disclaimer: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे कानूनी या चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

उत्तर लिखा · 14/3/2025
कर्म · 1020