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राजमिस्त्री का सरकारी रेट कितना है?

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राजमिस्त्री का सरकारी रेट कितना है?

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राजमिस्त्री (Mason) के लिए सरकारी दरें विभिन्न कारकों पर निर्भर करती हैं, जिनमें क्षेत्र, कौशल स्तर और सरकारी योजनाएँ शामिल हैं। भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारें श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी दरें निर्धारित करती हैं, जिनमें राजमिस्त्री भी शामिल हैं।

  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी: श्रम और रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दरें 1 अक्टूबर, 2024 से प्रभावी हैं। इन दरों को कौशल स्तरों (अकुशल, अर्ध-कुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल) और भौगोलिक क्षेत्रों (ए, बी और सी) के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। कुशल श्रमिकों के लिए, जो राजमिस्त्री के लिए उपयुक्त श्रेणी है, 'ए' क्षेत्र में प्रति दिन न्यूनतम मजदूरी 954 रुपये (प्रति माह 24,804 रुपये) और अत्यधिक कुशल श्रमिकों के लिए 1,035 रुपये प्रति दिन (प्रति माह 26,910 रुपये) निर्धारित की गई है। ये दरें केंद्रीय क्षेत्र के प्रतिष्ठानों के भीतर निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों पर लागू होती हैं।

  • राज्य-विशिष्ट दरें: विभिन्न राज्यों की अपनी न्यूनतम मजदूरी दरें होती हैं। उदाहरण के लिए, झारखंड में 2021 में राजमिस्त्री के लिए प्रतिदिन 550 रुपये की सरकारी दर निर्धारित की गई थी, जो आठ घंटे के काम के लिए थी।

  • प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना: यह योजना राजमिस्त्रियों और अन्य कारीगरों को कौशल विकास के लिए सहायता प्रदान करती है। इस योजना के तहत प्रशिक्षण अवधि के दौरान प्रतिदिन 500 रुपये का वजीफा (स्टाइपेंड) दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, आधुनिक औजार खरीदने के लिए 15,000 रुपये का टूलकिट ई-वाउचर और 3 लाख रुपये तक का आसान ऋण भी प्रदान किया जाता है। यह राशि सीधे काम के लिए मजदूरी नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण और उपकरण सहायता के लिए है।

  • सामान्य बाजार दरें: सरकारी दरों के अलावा, राजमिस्त्रियों की बाजार दरें अनुभव, काम के प्रकार और स्थान के आधार पर भिन्न होती हैं। कुछ जगहों पर प्रतिदिन 400 से 500 रुपये या मासिक 12,000 से 15,000 रुपये तक की दरें देखी गई हैं। लुधियाना जैसे शहरों में कुशल राजमिस्त्री प्रतिदिन 800 रुपये तक कमा सकते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 के तहत न्यूनतम मजदूरी दरों को औद्योगिक श्रमिकों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में औसत वृद्धि के आधार पर साल में दो बार (1 अप्रैल और 1 अक्टूबर से प्रभावी) संशोधित किया जाता है।

उत्तर लिखा · 25/11/2025
कर्म · 1020

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