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भारत संविधान की परिभाषाए?
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भारत का संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। यह भारत की राजनीतिक व्यवस्था की नींव और ढांचे को निर्धारित करता है, सरकार के विभिन्न अंगों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, शक्तियाँ और कर्तव्य परिभाषित करता है।
यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों, निदेशक सिद्धांतों और कर्तव्यों को भी निर्धारित करता है।
कुछ मुख्य बातें जो भारत के संविधान को परिभाषित करती हैं:
- सर्वोच्च कानून: यह भारत का सर्वोच्च कानून है, जिसका अर्थ है कि देश के सभी अन्य कानून और नीतियाँ इसके अधीन हैं।
- लिखित और सबसे लंबा: यह दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें एक प्रस्तावना, 25 भाग, 448 अनुच्छेद (मूल रूप से 395) और 12 अनुसूचियाँ शामिल हैं।
- सरकार का ढांचा: यह भारत को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित करता है और संसदीय प्रणाली की सरकार की स्थापना करता है।
- मौलिक अधिकार और कर्तव्य: यह नागरिकों के लिए मौलिक अधिकारों की गारंटी देता है और उनके कर्तव्यों को भी निर्धारित करता है।
- न्यायिक सर्वोच्चता: भारतीय न्यायपालिका, विशेषकर सर्वोच्च न्यायालय, संविधान की संरक्षक है और उसके पास कानूनों की संवैधानिक वैधता की समीक्षा करने की शक्ति है।
- संसद और राज्य विधानसभाएँ: यह संसद और राज्य विधानसभाओं की शक्तियों, प्रक्रियाओं और संरचना को निर्धारित करता है।
संक्षेप में, भारत का संविधान वह पवित्र ग्रंथ है जो भारत के शासन और उसके नागरिकों के अधिकारों व कर्तव्यों की रूपरेखा तैयार करता है, और देश के लोकतांत्रिक मूल्यों व सिद्धांतों को स्थापित करता है। इसे 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा द्वारा अपनाया गया था और 26 जनवरी, 1950 को यह पूरी तरह से लागू हुआ।