जीवनी
नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी का जन्म 23 जनवरी, 1897 को ओडिशा के कटक (तब बंगाल प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत का हिस्सा) में हुआ था।
महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था।
उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, और उन्हें प्यार से मनु कहा जाता था।
स्रोत:
- शिक्षा: नरेंद्र मोदी ने 1978 में दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग से राजनीति विज्ञान में कला स्नातक (बीए) की डिग्री प्राप्त की। 1983 में, उन्होंने गुजरात विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में मास्टर ऑफ आर्ट्स (एमए) की डिग्री प्राप्त की।
- संपत्ति: 2024 में दिए गए हलफनामे के अनुसार, नरेंद्र मोदी की कुल संपत्ति लगभग 3.02 करोड़ रुपये है। उनके पास गांधीनगर, गुजरात में एक आवासीय प्लॉट है। उनके पास 38,750 रुपये नकद हैं, और बैंक एफडी योजनाओं में 1.27 करोड़ रुपये जमा हैं। उन्होंने राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी) में भी 7.61 लाख रुपये का निवेश किया है। उनके पास सोने की चार अंगूठियां हैं जिनका कुल वजन 45 ग्राम है और जिसकी कीमत 1.13 लाख रुपये है। उनके पास कोई घर या कार नहीं है.
- प्रधानमंत्री के रूप में कार्यकाल: नरेंद्र मोदी ने 26 मई 2014 को पहली बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उन्होंने 9 जून 2024 को अपना तीसरा कार्यकाल शुरू किया। इस प्रकार, वे 10 साल से अधिक समय से प्रधानमंत्री हैं.
यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त हुई है:
- पत्रिका न्यूज़: पत्रिका न्यूज़
- दैनिक भास्कर: दैनिक भास्कर
सूरदास हिंदी साहित्य के भक्ति काल के एक महान कवि थे, विशेष रूप से कृष्ण भक्ति शाखा में। उनका साहित्यिक जीवन कृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति और उनकी रचनाओं में कृष्ण के बाल रूप और लीलाओं के सुंदर चित्रण के लिए जाना जाता है।
जन्म और प्रारंभिक जीवन:
- सूरदास का जन्म रुनकता नामक गांव में हुआ था, जो आगरा के पास स्थित है।
- वे जन्म से अंधे थे या बाद में अंधे हो गए, इस पर विद्वानों में मतभेद है।
- उन्होंने अपना प्रारंभिक जीवन भक्ति और संगीत में बिताया।
दीक्षा और भक्ति:
- सूरदास ने वल्लभाचार्य से दीक्षा ली, जिन्होंने उन्हें कृष्ण भक्ति का मार्ग दिखाया।
- वे कृष्ण के अनन्य भक्त बन गए और अपना जीवन कृष्ण की लीलाओं का गान करने में समर्पित कर दिया।
प्रमुख रचनाएँ:
- सूरसागर: यह सूरदास की सबसे प्रसिद्ध रचना है, जिसमें कृष्ण की लीलाओं का विस्तृत वर्णन है। इसमें सवा लाख पदों का संग्रह है, जिनमें से कुछ ही अब तक उपलब्ध हैं।
- सूरसारावली: यह सूरदास की दूसरी महत्वपूर्ण रचना है, जिसमें 1107 छंद हैं और यह एक संक्षिप्त रचना है।
- साहित्य लहरी: इसमें 118 दृष्टिकूट पद हैं, जो राधा और कृष्ण के प्रेम और भक्ति से संबंधित हैं।
साहित्यिक विशेषताएं:
- कृष्ण भक्ति: सूरदास की रचनाओं में कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति और प्रेम का चित्रण है।
- बाल लीला वर्णन: उन्होंने कृष्ण के बाल रूप और उनकी लीलाओं का मनोहारी वर्णन किया है, जो पाठकों को आनंदित करता है।
- भाषा: सूरदास ने अपनी रचनाओं में ब्रज भाषा का प्रयोग किया है, जो मधुर और लयबद्ध है।
- भावनात्मक गहराई: उनकी कविताओं में भावनाओं की गहराई है, जो पाठकों को कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति से जोड़ती है।
सूरदास का साहित्यिक जीवन कृष्ण भक्ति और हिंदी साहित्य के लिए एक अनमोल धरोहर है। उनकी रचनाएँ आज भी लोगों को प्रेरित करती हैं और कृष्ण के प्रति प्रेम और भक्ति का मार्ग दिखाती हैं।
अधिक जानकारी के लिए, आप इन वेबसाइटों पर जा सकते हैं: