दिन विशेष
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? महिलाओं के अधिकार क्या है?
2 उत्तर
2
answers
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस? महिलाओं के अधिकार क्या है?
8
Answer link

💁♀ *अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस; जानें इतिहास*
👉 हर साल हम 8 मार्च को विश्व की प्रत्येक महिला के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं.
🙌 अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्पूर्ण विश्व की महिलाएं देश, जात-पात, भाषा, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से परे एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं. साथ ही पुरुष वर्ग भी इस दिन को महिलाओं के सम्मान में समर्पित करता है.
🧐 *पहला महिला दिवस*
सन 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ अमेरिका द्वारा पहली बार पूरे अमेरिका में 28 फरवरी को महिला दिवस मनाया गया. 1975 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने एक विशेष थीम के साथ महिला दिवस मनाने का निर्णय किया. महिला दिवस की पहली थीम थी- 'सेलिब्रेटींग द पास्ट, प्लेनिंग फॉर द फ्युचर.'
🎯 *1917 में हुई अधिकारिक घोषणा*
इतिहास की माने तो 1917 में रूस की महिलाओं ने एक आंदोलन छेड़ दिया. ये आंदोलन इतना असरदार रहा कि ज़ार ने सत्ता छोड़ी और महिलाओं को वोट देने का अधिकार मिला. कहा जाता है कि उन दिनों रूस में जुलियन कैलेंडर चलता था जबकि बाकि दुनिया में ग्रेगेरियन कैलेंडर. इन दोनों की तारीखों में कुछ अन्तर होता है. जुलियन कैलेंडर के मुताबिक 1917 की फरवरी का आखिरी इतवार 23 फ़रवरी को था जबकी ग्रेगेरियन कैलैंडर के अनुसार उस दिन तारीख 8 मार्च थी. यही कारण था कि हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की अधिकारिक घोषणा कर दी गई.
🔖 *2019 की थीम -*
इस बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम BalanceforBetter है, जिसकी घोषणा होते ही सोशल मीडिया पर लोगों के अंदर एक अलग तरह का उत्साह नजर आ रहा है. यह थीम महिलाओं को अपने अधिकार की लड़ाई लड़ने के लिए प्रोत्साहित करती है.
🙋♀ *भारत में महिलाओं की स्थिति*
👉 भारत में महिलाओं को शिक्षा, वोट देने का अधिकार और मौलिक अधिकार प्राप्त है. धीरे-धीरे परिस्थितियां बदल रही हैं. भारत में आज महिला आर्मी, एयर फोर्स, पुलिस, आईटी, इंजीनियरिंग, चिकित्सा जैसे क्षेत्र में पुरूषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हैं. माता-पिता अब बेटे-बेटियों में कोई फर्क नहीं समझते हैं. लेकिन यह सोच समाज के कुछ ही वर्ग तक सीमित है.
👉 सही मायने में महिला दिवस तब ही सार्थक होगा जब विश्व भर में महिलाओं को मानसिक व शारीरिक रूप से संपूर्ण आजादी मिलेगी, जहां उन्हें कोई प्रताड़ित नहीं करेगा, जहां उन्हें दहेज के लालच में जिंदा नहीं जलाया जाएगा, जहां कन्या भ्रूण हत्या नहीं की जाएगी, जहां बलात्कार नहीं किया जाएगा, जहां उसे बेचा नहीं जाएगा.
👉 समाज के हर महत्वपूर्ण फैसलों में उनके नजरिए को महत्वपूर्ण समझा जाएगा. तात्पर्य यह है कि उन्हें भी पुरूष के समान एक इंसान समझा जाएगा.
_____________________________________
🙅घर के बाहर महिलाओं के लिए सुरक्षा टिप्स
*************((((((
आप जब भी घर से बाहर निकलें तो कुछ चीजें हमेशा अपने पास रखें जैसे धारदार चाकू मिर्ची स्प्रे, पेपर स्प्रे और इनको ऐसी जगह रखें ताकि जरूरत पड़ने पर आप इनका इस्तेमाल कर सकें। इसे आप हमलावर की आंखों में स्प्रे कर भाग सकती हैं, जब तक वह संभलेगा तब तक आप भाग जाएंगी।
अगर आप रोड पर चल रही हैं तो हेडफोन का प्रयोग न करें, क्योंकि इससे हमलावर आप पर पीछे से हमला करेगा, आपको पता भी नहीं चलेगा और आप संभल भी नहीं पायेंगी।सड़क पर चलते समय भी अलर्ट रहें। कुछ भी गलत गतिविधि लगे तो आप शोर मचाकर भीड़ इकट्ठा कर अपनी सुरक्षा भी कर सकती हैं।
हादसे, घटना कभी भी और कहीं भी हो सकते हैं इसलिए हमेशा सावधान रहें। आप खुद की सुरक्षा के लिए उस पर हमला भी कर सकती हैं। लेकिन पहले अपनी क्षमता को जानना बहुत आवश्यक है। ध्यान रहे कि आप में विश्वास और साहस का होना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसी साहस के दम पर न जाने कितनी महिलाओं ने कितने हमलावर को मार भगाया है।
जब हमलावर उन पर अटैक करता है तो ऐसी कितनी महिलाएं हैं, जिन्होंने अपने आसपास की चीजों का जैसे पर्स, झाड़ू, डंडे, सैंडल, पानी से भरी बोतल का सही इस्तेमाल कर हमलावर को धूल चटाई है।’ याद रहे, पहली बात खुद को झटके से तुरन्त उनसे छुड़ाकर उन पर किसी भी चीज से वार करने की कोशिश करें, ताकि आप स्वयं को बचा पाएं।
कभी आपको लगे की आपके पास खुद को बचाने के लिए कोई सामान नहीं है तो भी आप शोर मचाकर भीड़ इकठ्ठा करने की कोशिश करें। खुद को बचाने की तब तक हर कोशिश करनी है जब तक यह कोशिश कामयाब न हो जाए।
★★★★★◆●★★★★★
★★★★★◆●★★★★★
🙅🏼💁🏼 *हर भारतीय महिला को पता होने चाहिए ये 10 कानूनी अधिकार*💁🏼🙅🏼
🌷जैसे-जैसे समय बदल रहा है कानूनी मामलों में भी महिलाओं को अपनी स्थिति के बारे में जागरुक होना चाहिए.
🌹 अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हम एक आर्थिक और राजनीतिक शक्ति पुंज के रूप में उभर रहे हैं. हमारे संविधान ने हमें जो अधिकार और अवसर दिए हैं उन्हें भी प्रमुखता मिल रही है. आज महिलाएं भी मेहनत कर रही हैं और अपने करियर को लेकर गंभीर हैं. हांलाकि, मानसिक, शारीरिक और यौन उत्पीड़न, स्त्री द्वेष और लिंग असमानता इनमें से ज्यादातर के लिए जीवन का हिस्सा बन गई हैं. ऐसे में महिलाओं को भी भारतीय कानून द्वारा दिए गए अधिकारों के प्रति जागरुकता होनी चाहिए.
♦♦♦♦♦
★1. *समान वेतन का अधिकार-* समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता.
★2. *काम पर हुए उत्पीड़न के खिलाफ अधिकार-* काम पर हुए यौन उत्पीड़न अधिनियम के अनुसार आपको यौन उत्पीड़न के खिलाफ शिकायत दर्ज करने का पूरा अधिकार है.
★3. *नाम न छापने का अधिकार-* यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है. अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है.
★4. *घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार-* ये अधिनियम मुख्य रूप से पति, पुरुष लिव इन पार्टनर या रिश्तेदारों द्वारा एक पत्नी, एक महिला लिव इन पार्टनर या फिर घर में रह रही किसी भी महिला जैसे मां या बहन पर की गई घरेलू हिंसा से सुरक्षा करने के लिए बनाया गया है. आप या आपकी ओर से कोई भी शिकायत दर्ज करा सकता है.
★5. *मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार-* मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा नहीं बल्कि ये उनका अधिकार है. मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के प्रसव के बाद 12 सप्ताह(तीन महीने) तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम शुरू कर सकती हैं.
★6. *कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार-* भारत के हर नागरिक का ये कर्तव्य है कि वो एक महिला को उसके मूल अधिकार- 'जीने के अधिकार' का अनुभव करने दें. गर्भाधान और प्रसव से पूर्व पहचान करने की तकनीक(लिंग चयन पर रोक) अधिनियम (PCPNDT) कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अधिकार देता है.
★7. *मुफ्त कानूनी मदद के लिए अधिकार-* बलात्कार की शिकार हुई किसी भी महिला को मुफ्त कानूनी मदद पाने का पूरा अधिकार है. स्टेशन हाउस आफिसर(SHO) के लिए ये ज़रूरी है कि वो विधिक सेवा प्राधिकरण(Legal Services Authority) को वकील की व्यवस्था करने के लिए सूचित करे.
★8. *रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार-* एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है.
★9. *गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार-* किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो, उसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए.
★10. *संपत्ति पर अधिकार-* हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है.
●●●●●●●●●●
*💁🏼महिलाओं के हक🙅🏼*
〰〰〰〰〰〰〰〰
〰〰〰〰〰〰〰〰
16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया के साथ जो कुछ हुआ उसने देश में महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा को लेकर कड़वी सच्चाई से लोगों को रूबरू करवाया। जरूरी है कि ऐसे में महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़े हर महत्वपूर्ण कानून और प्रावधानों पर नजर डाली जाए। इस बारे में तफ्सील से बता रहे हैं रसुल खडकाळे:
◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆
💠 *जमीन जायदाद में हक*
◆ _पिता की संपत्ति पर हक_
महिलाओं को अपने पिता और पिता की पुश्तैनी संपति में पूरा अधिकार मिला हुआ है। अगर लड़की के पिता ने खुद बनाई संपति के मामले में कोई वसीयत नहीं की है, तब उनके बाद प्रॉपर्टी में लड़की को भी उतना ही हिस्सा मिलेगा जितना लड़के को और उनकी मां को। जहां तक शादी के बाद इस अधिकार का सवाल है तो यह अधिकार शादी के बाद भी कायम रहेगा।
💠 पति से जुड़े हक
संपत्ति पर हक- शादी के बाद पति की संपत्ति में महिला का मालिकाना हक नहीं होता लेकिन पति की हैसियत के हिसाब से महिला को गुजारा भत्ता दिया जाता है। महिला को यह अधिकार है कि उसका भरण-पोषण उसका पति करे और पति की जो हैसियत है, उस हिसाब से भरण पोषण होना चाहिए। वैवाहिक विवादों से संबंधित मामलों में कई कानूनी प्रावधान हैं, जिनके जरिए पत्नी गुजारा भत्ता मांग सकती है।
कानूनी जानकार बताते हैं कि सीआरपीसी, हिंदू मैरिज ऐक्ट, हिंदू अडॉप्शन ऐंड मेंटिनेंस ऐक्ट और घरेलू हिंसा कानून के तहत गुजारे भत्ते की मांग की जा सकती है। अगर पति ने कोई वसीयत बनाई है तो उसके मरने के बाद उसकी पत्नी को वसीयत के मुताबिक संपत्ति में हिस्सा मिलता है। लेकिन पति अपनी खुद की अर्जित संपत्ति की ही वसीयत कर सकता है। पैतृक संपत्ति की अपनी पत्नी के फेवर में विल नहीं कर सकता। अगर पति ने कोई वसीयत नहीं बनाई हुई है और उसकी मौत हो जाए तो पत्नी को उसकी खुद की अर्जित संपत्ति में हिस्सा मिलता है, लेकिन पैतृक संपत्ति में वह दावा नहीं कर सकती।
अगर हो जाए अनबन
अगर पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर अनबन हो जाए और पत्नी पति से अपने और अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता चाहे तो वह सीआरपीसी की धारा-125 के तहत गुजारा भत्ता के लिए अर्जी दाखिल कर सकती है। साथ ही हिंदू अडॉप्शन ऐंड मेंटेनेंस ऐक्ट की धारा-18 के तहत भी अर्जी दाखिल की जा सकती है। घरेलू हिंसा कानून के तहत भी गुजारा भत्ता की मांग पत्नी कर सकती है। अगर पति और पत्नी के बीच तलाक का केस चल रहा हो तो वह हिंदू मैरिज ऐक्ट की धारा-24 के तहत गुजारा भत्ता मांग सकती है। पति-पत्नी में तलाक हो जाए तो तलाक के वक्त जो मुआवजा राशि तय होती है, वह भी पति की सैलरी और उसकी अर्जित संपत्ति के आधार पर ही तय होती है।
मिलेंगे और अधिकार
हाल ही में केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि तलाक होने पर महिला को पति की पैतृक व विरासत योग्य संपत्ति से भी मुआवजा या हिस्सेदारी मिलेगी। इस मामले में कानून बनाया जाना है और इसके बाद पत्नी का हक बढ़ने की बात कही जा रही है। अगर पत्नी को तलाक के बाद पति की पैतृक संपत्ति में भी हिस्सा दिए जाने का प्रावधान किया गया तो इससे महिलाओं का हक बढ़ेगा। वैसी स्थिति में पति इस बात का दावा नहीं कर सकता कि उसके पास अपनी कोई संपत्ति नहीं है या फिर उसकी नौकरी नहीं है। पैतृक संपत्ति में हक मिलने से तलाक के वक्त जब मुआवजा तय किया जाएगा, तो पति की सैलरी, उसकी अर्जित संपत्ति और पैतृक संपत्ति के आधार पर गुजारा भत्ता और मुआवजा तय किया जाएगा।
खुद की संपत्ति पर अधिकार
कोई भी महिला अपने हिस्से में आई पैतृक संपत्ति और खुद अर्जित संपत्ति को चाहे तो वह बेच सकती है। इसमें कोई दखल नहीं दे सकता। महिला इस संपत्ति का वसीयत कर सकती है और चाहे तो महिला उस संपति से अपने बच्चो को बेदखल भी कर सकती है।
*★घरेलू हिंसा से सुरक्षा*
महिलाओं को अपने पिता के घर या फिर अपने पति के घर सुरक्षित रखने के लिए डीवी ऐक्ट (डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट) का प्रावधान किया गया है। महिला का कोई भी डोमेस्टिक रिलेटिव इस कानून के दायरे में आता है।
🔸_*क्या है घरेलू हिंसा*_
घरेलू हिंसा का मतलब है महिला के साथ किसी भी तरह की हिंसा या प्रताड़ना। अगर महिला के साथ मारपीट की गई हो या फिर मानसिक प्रताड़ना दी गई हो तो वह डीवी ऐक्ट के तहत कवर होगा। महिला के साथ मानसिक प्रताड़ना से मतलब है ताना मारना या फिर गाली-गलौज करना या फिर अन्य तरह से भावनात्मक ठेस पहुंचाना। इसके अलावा आर्थिक प्रताड़ना भी इस मामले में कवर होता है। यानी किसी महिला को खर्चा न देना या उसकी सैलरी आदि ले लेना या फिर उसके नौकरी आदि से संबंधित दस्तावेज कब्जे में ले लेना भी प्रताड़ना है। इन तमाम मामलों में महिला चाहे वह पत्नी हो या बेटी या फिर मां ही क्यों न हो, वह इसके लिए आवाज उठा सकती है और घरेलू हिंसा कानून का सहारा ले सकती है। किसी महिला को प्रताड़ित किया जा रहा हो, उसे घर से निकाला जा रहा हो या फिर आर्थिक तौर पर परेशान किया जा रहा हो तो वह डीवी ऐक्ट के तहत शिकायत कर सकती है।
♦ _*क्या है डोमेस्टिक रिलेशन*_
एक ही छत के नीचे किसी भी रिश्ते के तहत रहने वाली महिला प्रताड़ना की शिकायत कर सकती है और वह हर रिलेशन डोमेस्टिक रिलेशन के दायरे में आएगा। डीवी ऐक्ट के तहत एक महिला जो शादी के रिलेशन में हो तो वह ससुराल में रहने वाले किसी भी महिला या पुरुष की शिकायत कर सकती है लेकिन वह डोमेस्टिक रिलेशन में होने चाहिए। अगर महिला शादी के रिलेशन में नहीं है और उसके साथ डोमेस्टिक रिलेशन में वॉयलेंस होती है तो वह ऐसी स्थिति में इसके लिए केवल जिम्मेदार पुरुष को ही प्रतिवादी बना सकती है। अपनी मां, बहन या भाभी को वह इस ऐक्ट के तहत प्रतिवादी नहीं बना सकती।
🔹 *डीवी एक्ट की धारा-12*
इसके तहत महिला मेट्रोपॉलिटन मैजिस्ट्रेट की कोर्ट में शिकायत कर सकती है। शिकायत पर सुनवाई के दौरान अदालत प्रोटेक्शन ऑफिसर से रिपोर्ट मांगता है। महिला जहां रहती है या जहां उसके साथ घरेलू हिंसा हुई है या फिर जहां प्रतिवादी रहते हैं, वहां शिकायत की जा सकती है। प्रोटेक्शन ऑफिसर इंसिडेंट रिपोर्ट अदालत के सामने पेश करता है और उस रिपोर्ट को देखने के बाद अदालत प्रतिवादी को समन जारी करता है। प्रतिवादी का पक्ष सुनने के बाद अदालत अपना आदेश पारित करती है। इस दौरान अदालत महिला को उसी घर में रहने देने, खर्चा देने या फिर उसे प्रोटेक्शन देने का आदेश दे सकती है। अगर अदालत महिला के फेवर में आदेश पारित करती है और प्रतिवादी उस आदेश का पालन नहीं करता है तो डीवी ऐक्ट-31 के तहत प्रतिवादी पर केस बनता है। इस एक्ट के तहत चलाए गए मुकदमे में दोषी पाए जाने पर एक साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। साथ ही, 20 हजार रुपये तक के जुर्माने का भी प्रावधान है। यह केस गैर जमानती और कॉग्नेजिबल होता है।
*★लिव-इन रिलेशन में भी डीवी ऐक्ट*
लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को डोमेस्टिक वॉयलेंस ऐक्ट के तहत प्रोटेक्शन मिला हुआ है। डीवी ऐक्ट के प्रावधानों के तहत उन्हें मुआवजा आदि मिल सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक लिव-इन रिलेशनशिप के लिए देश में नियम तय किए गए हैं। ऐसे रिश्ते में रहने वाले लोगों को कुछ कानूनी अधिकार मिले हुए हैं।
लिव-इन में अधिकार
सिर्फ उसी रिश्ते को लिव-इन रिलेशनशिप माना जा सकता है, जिसमें स्त्री और पुरुष विवाह किए बिना पति-पत्नी की तरह रहते हैं। इसके लिए जरूरी है कि दोनों बालिग और शादी योग्य हों। यदि दोनों में से कोई एक या दोनों पहले से शादीशुदा है तो उसे लिव-इन रिलेशनशिप नहीं कहा जाएगा। अगर दोनों तलाक शुदा हैं और अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तो इसे लिव-इन रिलेशन माना जाएगा। लिव-इन रिलेशन में रहने वाली महिला को घरेलू हिंसा कानून के तहत प्रोटेक्शन मिला हुआ है। अगर उसे किसी भी तरह से प्रताड़ित किया जाता है तो वह उसके खिलाफ इस ऐक्ट के तहत शिकायत कर सकती है। ऐसे संबंध में रहते हुए उसे राइट-टु-शेल्टर भी मिलता है। यानी जब तक यह रिलेशनशिप कायम है तब तक उसे जबरन घर से नहीं निकाला जा सकता। लेकिन संबंध खत्म होने के बाद यह अधिकार खत्म हो जाता है। लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को गुजारा भत्ता पाने का भी अधिकार है। हालांकि पार्टनर की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में अधिकार नहीं मिल सकता। लेकिन पार्टनर के पास बहुत ज्यादा प्रॉपर्टी है और पहले से गुजारा भत्ता तय हो रखा है तो वह भत्ता जारी रह सकता है, लेकिन उसे संपत्ति में कानूनी अधिकार नहीं है। यदि लिव-इन में रहते हुए पार्टनर ने वसीयत के जरिये संपत्ति लिव-इन पार्टनर को लिख दी है तो तो मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति पार्टनर को मिल जाती है।
♂♀ ~
सेक्शुअल हैरेसमेंट, छेड़छाड़ या फिर रेप जैसे वारदातों के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। महिलाओं के खिलाफ इस तरह के घिनौने अपराध करने वालों को सख्त सजा दिए जाने का प्रावधान किया गया है। 16 दिसंबर की गैंग रेप की घटना के बाद सरकार ने वर्मा कमिशन की सिफारिश पर ऐंटि-रेप लॉ बनाया। इसके तहत जो कानूनी प्रावधान किए गए हैं, उसमें रेप की परिभाषा में बदलाव किया गया है। आईपीसी की धारा-375 के तहत रेप के दायरे में प्राइवेट पार्ट या फिर ओरल सेक्स दोनों को ही रेप माना गया है। साथ ही प्राइवेट पार्ट के पेनिट्रेशन के अलावा किसी चीज के पेनिट्रेशन को भी इस दायरे में रखा गया है। अगर कोई शख्स किसी महिला के प्राइवेट पार्ट या फिर अन्य तरीके से पेनिट्रेशन करता है तो वह रेप होगा। अगर कोई शख्स महिला के प्राइवेट पार्ट में अपने शरीर का अंग या फिर अन्य चीज डालता है तो वह रेप होगा।
बलात्कार के वैसे मामले जिसमें पीड़िता की मौत हो जाए या कोमा में चली जाए, तो फांसी की सजा का प्रावधान किया गया। रेप में कम से कम 7 साल और ज्यादा से ज्यादा उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया गया है। रेप के कारण लड़की कोमा में चली जाए या फिर कोई शख्स दोबारा रेप के लिए दोषी पाया जाता है तो वैसे मामले में फांसी तक का प्रावधान किया गया है।
नए कानून के तहत छेड़छाड़ के मामलों को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। इसके तहत आईपीसी की धारा-354 को कई सब सेक्शन में रखा गया है। 354-ए के तहत प्रावधान है कि सेक्शुअल नेचर का कॉन्टैक्ट करना, सेक्शुअल फेवर मांगना आदि छेड़छाड़ के दायरे में आएगा। इसमें दोषी पाए जाने पर अधिकतम 3 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। अगर कोई शख्स किसी महिला पर सेक्शुअल कॉमेंट करता है तो एक साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। 354-बी के तहत अगर कोई शख्स महिला की इज्जत के साथ खेलने के लिए जबर्दस्ती करता है या फिर उसके कपड़े उतारता है या इसके लिए मजबूर करता है तो 3 साल से लेकर 7 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। 354-सी के तहत प्रावधान है कि अगर कोई शख्स किसी महिला के प्राइवेट ऐक्ट की तस्वीर लेता है और उसे लोगों में फैलाता है तो ऐसे मामले में एक साल से 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। अगर दोबारा ऐसी हरकत करता है तो 3 साल से 7 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। 354-डी के तहत प्रावधान है कि अगर कोई शख्स किसी महिला का जबरन पीछा करता है या कॉन्टैक्ट करने की कोशिश करता है तो ऐसे मामले में दोषी पाए जाने पर 3 साल तक कैद की सजा का प्रावधान है। जो भी मामले संज्ञेय अपराध यानी जिन मामलों में 3 साल से ज्यादा सजा का प्रावधान है, उन मामलों में शिकायती के बयान के आधार पर या फिर पुलिस खुद संज्ञान लेकर केस दर्ज कर सकती है।
■ _वर्क प्लेस पर प्रोटेक्शन_
वर्क प्लेस पर भी महिलाओं को तमाम तरह के अधिकार मिल हुए हैं। सेक्शुअल हैरेसमेंट से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में विशाखा जजमेंट के तहत गाइडलाइंस तय की थीं। इसके तहत महिलाओं को प्रोटेक्ट किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की यह गाइडलाइंस तमाम सरकारी व प्राइवेट दफ्तरों में लागू है। इसके तहत एंप्लॉयर की जिम्मेदारी है कि वह गुनहगार के खिलाफ कार्रवाई करे।
सुप्रीम कोर्ट ने 12 गाइडलाइंस बनाई हैं। एंप्लॉयर या अन्य जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी है कि वह सेक्शुअल हैरेसमेंट को रोके। सेक्शुअल हैरेसमेंट के दायरे में छेड़छाड़, गलत नीयत से टच करना, सेक्शुअल फेवर की डिमांड या आग्रह करना, महिला सहकर्मी को पॉर्न दिखाना, अन्य तरह से आपत्तिजनक व्यवहार करना या फिर इशारा करना आता है। इन मामलों के अलावा, कोई ऐसा ऐक्ट जो आईपीसी के तहत ऑफेंस है, की शिकायत महिला कर्मी द्वारा की जाती है, तो एंप्लॉयर की ड्यूटी है कि वह इस मामले में कार्रवाई करते हुए संबंधित अथॉरिटी को शिकायत करे।
कानून इस बात को सुनिश्चित करता है कि विक्टिम अपने दफ्तर में किसी भी तरह से पीड़ित-शोषित नहीं होगी। इस तरह की कोई भी हरकत दुर्व्यवहार के दायरे में होगा और इसके लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। प्रत्येक दफ्तर में एक कंप्लेंट कमिटी होगी, जिसकी चीफ महिला होगी। कमिटी में महिलाओं की संख्या आधे से ज्यादा होगी। इतना ही नहीं, हर दफ्तर को साल भर में आई ऐसी शिकायतों और कार्रवाई के बारे में सरकार को रिपोर्ट करना होगा। मौजूदा समय में वर्क प्लेस पर सेक्शुअल हैरेसमेंट रोकने के लिए विशाखा जजमेंट के तहत ही कार्रवाई होती है। इस बाबत कोई कानून नहीं है, इस कारण गाइडलाइंस प्रभावी है। अगर कोई ऐसी हरकत जो आईपीसी के तहत अपराध है, उस मामले में शिकायत के बाद केस दर्ज किया जाता है। कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई होती है।
💠 *मेटरनिटी लीव*
गर्भवती महिलाओं के कुछ खास अधिकार हैं। इसके लिए संविधान में प्रावधान किए गए हैं। संविधान के अनुच्छेद-42 के तहत कामकाजी महिलाओं को तमाम अधिकार दिए गए हैं। पार्लियामेंट ने 1961 में यह कानून बनाया था। इसके तहत कोई भी महिला अगर सरकारी नौकरी में है या फिर किसी फैक्ट्री में या किसी अन्य प्राइवेट संस्था में, जिसकी स्थापना इम्प्लॉइज स्टेट इंश्योरेंस ऐक्ट 1948 के तहत हुई हो, में काम करती है तो उसे मेटरनिटी बेनिफिट मिलेगा। इसके तहत महिला को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलती है जिसे वह अपनी जरूरत के हिसाब से ले सकती है। इस दौरान महिला को वही सैलरी और भत्ता दिया जाएगा जो उसे आखिरी बार दिया गया था। अगर महिला का अबॉर्शन हो जाता है तो भी उसे इस ऐक्ट का लाभ मिलेगा। इस कानून के तहत यह प्रावधान है कि अगर महिला प्रेग्नेंसी के कारण या फिर वक्त से पहले बच्चे का जन्म होता है या फिर गर्भपात हो जाता है और इन कारणों से अगर महिला बीमार होती है तो मेडिकल रिपोर्ट आधार पर उसे एक महीने का अतिरिक्त अवकाश मिल सकता है। इस दौरान भी उसे तमाम वेतन और भत्ते मिलते रहेंगे। इतना ही नहीं डिलिवरी के 15 महीने बाद तक महिला को दफ्तर में रहने के दौरान दो बार नर्सिंग ब्रेक मिलेगा। केन्द्र सरकार ने सुविधा दी है कि सरकारी महिला कर्मचारी, जो मां हैं या बनने वाली हैं तो उन्हें मेटरनिटी पीरियड में विशेष छूट मिलेगी। इसके तहत महिला कर्मचारियों को अब 135 दिन की जगह 180 दिन की मेटरनिटी लीव मिलेगी। इसके अलावा वह अपनी नौकरी के दौरान दो साल (730 दिन) की छुट्टी ले सकेंगी। यह छुट्टी बच्चे के 18 साल के होने तक वे कभी भी ले सकती हैं। यानी कि बच्चे की बीमारी या पढ़ाई आदि में, जैसी जरूरत हो।
मेटरनिटी लीव के दौरान महिला पर किसी तरह का आरोप लगाकर उसे नौकरी से नहीं निकाला जा सकता। अगर महिला का एम्प्लॉयर इस बेनिफिट से उसे वंचित करने की कोशिश करता है तो महिला इसकी शिकायत कर सकती है। महिला कोर्ट जा सकती है और दोषी को एक साल तक कैद की सजा हो सकती है।
।
💠 *ससुराल में कानूनी कवच*
अबॉर्शन के लिए महिला की सहमति अनिवार्य
महिला की सहमित के बिना उसका अबॉर्शन नहीं कराया जा सकता। जबरन अबॉर्शन कराए जाने के मामलों से निबटने के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। कानूनी जानकार बताते हैं कि अबॉर्शन तभी कराया जा सकता है, जब गर्भ की वजह से महिला की जिंदगी खतरे में हो। 1971 में इसके लिए एक अलग कानून बनाया गया- मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट। ऐक्ट के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अगर गर्भ के कारण महिला की जान खतरे में हो या फिर मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर परेशानी पैदा करने वाले हों या गर्भ में पल रहा बच्चा विकलांगता का शिकार हो तो अबॉर्शन कराया जा सकता है। इसके अलावा, अगर महिला मानसिक या फिर शारीरिक तौर पर इसके लिए सक्षम न हो भी तो अबॉर्शन कराया जा सकता है। अगर महिला के साथ बलात्कार हुआ हो और वह गर्भवती हो गई हो या फिर महिला के साथ ऐसे रिश्तेदार ने संबंध बनाए जो वर्जित संबंध में हों और महिला गर्भवती हो गई हो तो महिला का अबॉर्शन कराया जा सकता है। अगर किसी महिला की मर्जी के खिलाफ उसका अबॉर्शन कराया जाता है, तो ऐसे में दोषी पाए जाने पर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है।
💸 💴💵💷💶 *दहेज निरोधक कानून*
दहेज प्रताड़ना और ससुराल में महिलाओं पर अत्याचार के दूसरे मामलों से निबटने के लिए कानून में सख्त प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं को उसके ससुराल में सुरक्षित वातावरण मिले, कानून में इसका पुख्ता प्रबंध है। दहेज प्रताड़ना से बचाने के लिए 1986 में आईपीसी की �
______________________
💁♀ *पीड़ित महिला कहीं भी दर्ज करा सकती है दहेज उत्पीड़न की शिकायत: सुप्रीम कोर्ट*
🏛 दहेज उत्पीड़न के चलते पति का घर या ससुराल छोड़ने वाली महिला के लिए उसी शहर में शिकायत दर्ज करवाना ज़रूरी नहीं है. कोर्ट ने कहा है कि महिला अपने माता-पिता के शहर या जहां भी वो रह रही है, वहां शिकायत दर्ज करवा सकती है.
❗ *क्यों था विवाद?*
🚨 इस मसले पर विवाद इसलिए था क्योंकि CrPC के प्रावधानों के तहत किसी मामले की FIR वहीं दर्ज होती है, जहां घटना हुई है. ये मसला सुप्रीम कोर्ट तब पहुंचा जब दहेज उत्पीड़न के मामलों में अलग-अलग हाई कोर्ट ने अलग फैसले दिए. कुछ मामलों में हाई कोर्ट ने महिला की तरफ से पिता के शहर में दर्ज करवाई गई शिकायत को सही ठहराया. जबकि, कुछ मामलों में कहा कि किसी और जगह हुए अपराध पर दूसरे शहर की कोर्ट संज्ञान नहीं ले सकती.
⚖ इस आदेश से साफ है कि प्रताड़ना के चलते पति का घर छोड़ने वाली महिला न सिर्फ अपने पिता के शहर में, बल्कि किसी भी ऐसे शहर में शिकायत दर्ज करवा सकती है जहां उसने शरण ली है.
—
*(♻) शाम के वक्त महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हो सकती*-
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर, सेक्शन 46 के तहत शाम 6 बजे के बाद और सुबह 6 के पहले भारतीय पुलिस किसी भी महिला को गिरफ्तार नहीं कर सकती, फिर चाहे गुनाह कितना भी संगीन क्यों ना हो. अगर पुलिस ऐसा करते हुए पाई जाती है तो गिरफ्तार करने वाले पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत (मामला) दर्ज की जा सकती है. इससे उस पुलिस अधिकारी की नौकरी खतरे में आ सकती है.
*(♻) गर्भवती महिलाओं को नौकरी से नहीं निकाला जा सकता*-
मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट 1961 के मुताबिक़ गर्भवती महिलाओं को अचानक नौकरी से नहीं निकाला जा सकता. मालिक को पहले तीन महीने की नोटिस देनी होगी और प्रेगनेंसी के दौरान लगने वाले खर्चे का कुछ हिस्सा देना होगा. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ सरकारी रोज़गार संघटना में शिकायत कराई जा सकती है. इस शिकायत से कंपनी बंद हो सकती है या कंपनी को जुर्माना भरना पड़ सकता है.
★★★★★★★★★★
_*इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेअर करें ताकी ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें*_
⚜🔰⚜🔰⚜🔰⚜🔰⚜
_*GK जनरल नॉलेज ग्रुप*_
📚📖📚📖📚📖📚📖
♂ _रसुल खडकाळे_ ♂
*★+91916839035★*
🎊🎊🎊🎊🎊🎊
मुझे कोई कॉल मत करना
*
मैं व्यस्त हूँ।
आप अगर ग्रुप जॉईन करना चाहते हैं,तो मेरे व्हाट्सअप्प नंबर पर अपना पुरा नाम,पता भेजें।
📖📚🌷🌹⚜📖📚🌷🌹⚜
*GK जनरल नॉलेज ग्रुप*
📖📚🌷📖📚🌹📖📚💐
📞_*+919168390345*_
●●●●●●●●●●●●●●●●●●●
0
Answer link
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हर साल 8 मार्च को मनाया जाता है। यह दिन महिलाओं की उपलब्धियों को मनाने और लैंगिक समानता के बारे में जागरूकता बढ़ाने का दिन है।
महिलाओं के अधिकार:
- समानता का अधिकार: महिलाओं को पुरुषों के समान अधिकार और अवसर मिलने चाहिए।
- शिक्षा का अधिकार: महिलाओं को शिक्षा प्राप्त करने का समान अधिकार होना चाहिए।
- काम करने का अधिकार: महिलाओं को अपनी पसंद का काम करने और समान वेतन पाने का अधिकार होना चाहिए।
- राजनीतिक अधिकार: महिलाओं को वोट देने, चुनाव लड़ने और राजनीतिक पदों पर रहने का अधिकार होना चाहिए।
- स्वास्थ्य का अधिकार: महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य देखभाल के बारे में निर्णय लेने का अधिकार होना चाहिए।
- हिंसा से मुक्त जीवन का अधिकार: महिलाओं को हर तरह की हिंसा से मुक्त जीवन जीने का अधिकार होना चाहिए।
अधिक जानकारी के लिए, आप निम्न वेबसाइटों पर जा सकते हैं: