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फसल कटाई के बाद क्या किया जाना चाहिए जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहे?
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फसल कटाई के बाद मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं:
- फसल अवशेष प्रबंधन: कटाई के बाद बची हुई फसल के अवशेषों को खेत में ही छोड़ देना चाहिए। ये अवशेष धीरे-धीरे विघटित होकर मिट्टी में पोषक तत्वों को वापस मिला देते हैं। इससे मिट्टी की संरचना में भी सुधार होता है।
- हरी खाद: ढैंचा, सनई, लोबिया आदि फसलों को उगाकर उन्हें मिट्टी में मिला देना चाहिए। हरी खाद मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा को बढ़ाती है और पोषक तत्वों की उपलब्धता में सुधार करती है।
- दलहनी फसलें: फसल चक्र में दलहनी फसलों (जैसे चना, मटर, मसूर) को शामिल करना चाहिए। ये फसलें वायुमंडल से नाइट्रोजन को मिट्टी में स्थिर करती हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है।
- खाद और उर्वरक: मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद और उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। गोबर की खाद, कम्पोस्ट खाद और वर्मीकम्पोस्ट का उपयोग मिट्टी को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है। रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए।
- मृदा संरक्षण: मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए उपाय करने चाहिए। ढलान वाले खेतों में मेड़बंदी और समोच्च जुताई करनी चाहिए। इससे मिट्टी की ऊपरी परत बची रहती है, जो सबसे उपजाऊ होती है।
- फसल चक्र: एक ही फसल को बार-बार उगाने से मिट्टी के पोषक तत्व कम हो जाते हैं। इसलिए, फसल चक्र अपनाना चाहिए, जिसमें विभिन्न प्रकार की फसलों को अदल-बदल कर उगाया जाता है।
- जैविक खाद: जैविक खाद जैसे कि जीवामृत, बीजामृत और वेस्ट डीकम्पोजर का उपयोग मिट्टी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है।
इन उपायों को अपनाकर मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखा जा सकता है, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होती है।