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अहोम राज्य का प्रशासन कैसे संगठित था?
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अहोम राज्य का प्रशासन अत्यंत सुव्यवस्थित और विकेन्द्रीकृत होने के बजाय काफी केंद्रीकृत था, लेकिन इसमें स्थानीय स्तर पर भी पर्याप्त अधिकार दिए गए थे। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार थीं:
- राजा (स्वर्गदेव): राजा राज्य का सर्वोच्च मुखिया होता था। वह सेना का सेनापति, न्याय का अंतिम स्रोत और सभी प्रशासनिक निर्णयों का केंद्र था। राजा को 'स्वर्गदेव' के नाम से भी जाना जाता था।
- मंत्रिपरिषद (पाँच गोहेन): अहोम प्रशासन में एक शक्तिशाली मंत्रिपरिषद होती थी, जिसमें मुख्य रूप से तीन गोहेन (मुख्य मंत्री) होते थे:
- बुरहागोहेन (Burhagohain): यह सबसे वरिष्ठ मंत्री होता था, जो अक्सर सैन्य और नागरिक प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था और राजा को सलाह देता था।
- बोरगोहेन (Borgohain): यह दूसरा महत्वपूर्ण मंत्री था, जिसकी जिम्मेदारियाँ भी बुरहागोहेन के समान थीं। ये दोनों पद अक्सर वंशानुगत होते थे।
- बोरपात्रगोहेन (Borpatrogohain): यह पद बाद में स्थापित किया गया था और यह भी एक उच्च पदस्थ मंत्री था।
- फुकन (Phukan): ये विभिन्न विभागों के प्रमुख थे। इनमें से कुछ महत्वपूर्ण फुकन थे:
- बोरफुकन (Borphukan): यह गुवाहाटी क्षेत्र का सैन्य और नागरिक प्रशासक था और राजा के बाद सबसे शक्तिशाली अधिकारी माना जाता था।
- बरबरुआ (Borbarua): यह सर्वोच्च न्यायिक और कार्यकारी अधिकारी होता था, जो सीधे राजा के अधीन कार्य करता था।
- नाओसोलिया फुकन (Naosalia Phukan): नौसेना का प्रमुख।
- राजखोवा फुकन (Rajkhowa Phukan): सीमांत क्षेत्रों के प्रशासक।
- बरुआ (Barua): ये विभिन्न विभागों के अधीक्षक थे। जैसे:
- दीघलिया बरुआ (Dighalia Barua): शाही दस्तावेजों का प्रभारी।
- हजारीका बरुआ (Hazarika Barua): एक हजार पाइक का सेनापति।
- दहेकिया बरुआ (Dekhia Barua): न्याय प्रशासन से संबंधित।
- पाइक प्रणाली (Paik System): यह अहोम प्रशासन की एक अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता थी। यह एक प्रकार की अनिवार्य सैन्य और श्रम सेवा प्रणाली थी।
- राज्य के प्रत्येक वयस्क पुरुष को (जो पाइक कहलाता था) बारी-बारी से राज्य के लिए कुछ समय तक (आमतौर पर प्रति वर्ष तीन-चार महीने) सेवा प्रदान करनी होती थी। इस सेवा के बदले में उन्हें भूमि दी जाती थी और करों में छूट मिलती थी।
- पाइक विभिन्न कार्यों में लगे होते थे, जैसे सेना में सेवा, सार्वजनिक निर्माण (जैसे बांध, नहरें, सड़कें), कृषि, शिल्पकारी आदि।
- पाइकों को छोटी इकाइयों में संगठित किया गया था:
- बोरा (Bora): 20 पाइक का प्रमुख।
- सैकिया (Saikia): 100 पाइक का प्रमुख।
- हजारीका (Hazarika): 1000 पाइक का प्रमुख।
- इस प्रणाली ने अहोम राज्य को एक मजबूत सेना, पर्याप्त श्रम शक्ति और आर्थिक स्थिरता प्रदान की।
- भूमि प्रशासन: भूमि का वितरण और कर संग्रह पाइक प्रणाली से जुड़ा था। भूमि को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया था और राज्य द्वारा नियंत्रित किया जाता था।
- न्याय प्रणाली: न्याय राजा द्वारा और विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों द्वारा दिया जाता था। बरबरुआ सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी होता था।
कुल मिलाकर, अहोम प्रशासन एक जटिल और कुशल प्रणाली थी जिसने लगभग 600 वर्षों तक राज्य की स्थिरता और शक्ति को बनाए रखने में मदद की।