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संविधान
1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतरों को बताइए। भारतीय संदर्भ में सत्ता की स्थिति का एक उदाहरण दीजिए?
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1992 के संविधान संशोधन के पहले और बाद के स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतरों को बताइए। भारतीय संदर्भ में सत्ता की स्थिति का एक उदाहरण दीजिए?
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1992 के संविधान संशोधन से पहले और बाद में स्थानीय शासन के दो महत्वपूर्ण अंतर:
- संवैधानिक दर्जा:
- पहले: स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा प्राप्त नहीं था। यह राज्य सरकारों की इच्छा पर निर्भर था कि वे स्थानीय निकायों को किस प्रकार की शक्तियाँ और कार्य सौंपती हैं।
- बाद में: 73वें और 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से, स्थानीय शासन को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हुआ। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि राज्यों को स्थानीय निकायों का गठन करना होगा और उन्हें नियमित चुनाव कराने होंगे।
- शक्तियों का हस्तांतरण:
- पहले: स्थानीय निकायों को राज्य सरकारों द्वारा सीमित शक्तियाँ सौंपी जाती थीं।
- बाद में: संविधान संशोधन में यह अनिवार्य किया गया कि राज्य सरकारें स्थानीय निकायों को कुछ निश्चित विषयों पर शक्तियाँ और उत्तरदायित्व सौंपें, ताकि वे स्वशासन की संस्थाओं के रूप में कार्य कर सकें।
भारतीय संदर्भ में सत्ता की स्थिति का एक उदाहरण:
ग्राम पंचायत, जो कि स्थानीय स्वशासन का एक उदाहरण है। ग्राम पंचायत को गाँव के विकास और प्रशासन के लिए कई शक्तियाँ दी गई हैं, जैसे कि गाँव में सड़कें बनवाना, पानी की व्यवस्था करना, और स्वच्छता का ध्यान रखना। यह सत्ता का विकेंद्रीकरण है, जहाँ शक्ति को केंद्र या राज्य सरकार से लेकर स्थानीय स्तर तक पहुँचाया गया है। पंचायती राज मंत्रालय इस सम्बन्ध में जानकारी प्रदान करता है।