भगवान

भगवान श्री कृष्ण से प्रेम कैसे होगा?

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भगवान श्री कृष्ण से प्रेम कैसे होगा?

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भगवान श्रीकृष्ण जो समस्त प्राणीमात्र के स्वामी हैं। अतः उन आनंदकंद सच्चिदानंद स्वरुप अनंत कोटि ब्रह्माण्ड नायक कुंजनि कुंजेश्वर राधारमण बाधाहरण श्री वृन्दावन चंद्र भगवान श्री कृष्ण को हम नमन करते हैं।


भगवान से आप एक कोई भी नाता जोड़ लीजिए। आप उन्हें सखा अर्थात् मित्र, पिता, माता, भाई भी मान सकते हैं। जैसे हमें किसी भी लड़की से प्रेम होता है तब हमें उसका ही ख्याल आता रहता है। बार बार वही दिखाई देती है। हम उसके बारे में ही सोचते रहते हैं।

उसी प्रकार भगवान से प्रेम  होना चाहिए। भगवान से प्रेम तब होता है जब हम उन्हें जान ले, उनके गुणों को जान ले, उनकी लीला को जान ले। वास्तव में वह कौन है ? यह जान ले।

सबसे पहले आप रामानंद सागर के श्रीकृष्ण के एपिसोड देखें लें। हो सके तो श्रीमद्भागवत कथा पढ़ लें। श्रीमद्भागवत कथा किसी से भी मत सुनिए जो उत्तम पुरुष उसी से ही सुनिए जैसे गौरव कृष्ण गोस्वामी जी महाराज। रामानंद सागर श्रीकृष्ण के सिवाय और भक्तीमय दुसरा सिरियल नहीं है और हैभी तो वह आपकी भक्ति कम कर देगा। Big magic का श्री कृष्ण का सिरियल fake दिखाते हैं।

आप निजानंद संप्रदाय या श्रीकृष्ण प्रणामी संप्रदाय के ग्रंथ पढ़ें। यह मेरा अनुभव है क्योंकि मैं भी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करने वाला बहुत ही सामान्य भक्त हूं।

जय श्री राधे कृष्ण



उत्तर लिखा · 16/1/2020
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भगवान श्री कृष्ण से प्रेम करने के कई तरीके हैं, जिनमें से कुछ यहां दिए गए हैं:

  1. श्रद्धा और विश्वास: सबसे पहले, भगवान श्री कृष्ण में गहरी श्रद्धा और विश्वास होना आवश्यक है। उन्हें अपना मार्गदर्शक और रक्षक मानें।
  2. भक्ति और प्रार्थना: नियमित रूप से भक्ति और प्रार्थना करें। कृष्ण मंत्रों का जाप करें और उनकी आरती करें।
  3. उनकी लीलाओं का अध्ययन: श्रीमद्भागवत पुराण और महाभारत जैसे ग्रंथों में उनकी लीलाओं का अध्ययन करें। इससे आपको उनकी महिमा और प्रेम का ज्ञान होगा।
  4. सेवा: निस्वार्थ भाव से दूसरों की सेवा करें। भगवान कृष्ण ने हमेशा दूसरों की मदद करने पर जोर दिया है।
  5. कीर्तन और भजन: कृष्ण के भजनों और कीर्तनों में भाग लें। इससे आपके मन में प्रेम और भक्ति का संचार होगा।
  6. ध्यान: नियमित रूप से ध्यान करें और भगवान कृष्ण के स्वरूप का चिंतन करें।
  7. गुरु का मार्गदर्शन: एक योग्य गुरु से मार्गदर्शन प्राप्त करें जो आपको सही मार्ग दिखा सके।
  8. प्रेमपूर्ण हृदय: अपने हृदय को प्रेम और करुणा से भरें। दूसरों के प्रति दयालु रहें और सभी प्राणियों में भगवान कृष्ण का दर्शन करें।

ध्यान दें: भक्ति एक व्यक्तिगत अनुभव है, और हर व्यक्ति का तरीका अलग हो सकता है। महत्वपूर्ण यह है कि आप सच्चे मन से भगवान कृष्ण से प्रेम करें।

उत्तर लिखा · 12/3/2025
कर्म · 1020

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